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प्रश्न - सारा आकाश उपन्यास के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।

प्रश्न - सारा आकाश उपन्यास के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
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उत्तर - उपन्यासकार राजेन्द्र यादव स्वातंत्र्योत्तर हिन्दी साहित्य में विशिष्ट स्थान रखते हैं। इन्होंने एम०ए० हिन्दी की परीक्षा 1951 में आगरा विश्वविद्‌यालय से  प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की। यादव जी का हिन्दी तथा उर्दू भाषा के अतिरिक्त अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मनी आदि भाषाओं पर भी जबरदस्त अधिकार था।

उन्होंने अपने साहित्य में मानवीय जीवन के तनावों और संघर्षों को पूरी संवेदनशीलता से जगह दी है।

लित और स्त्री मुद्दों को साहित्य के केंद्र में लेकर आए।राजेन्द्र यादव की भाषा सहज, सुबोध, व्यावहारिक तथा मुहावरायुक्त है। उनकी भाषा आम-जन की भाषा है। उनकी भाषा में तद्‌भव, तत्सम, देशज, अरबी-फ़ारसी तथा अँग्रेजी शब्दावली की भरमार है।

प्रमुख रचनाएँ - उखड़े हुए लोग, शह और मात, एक इंच

मुस्कानछोटे-छोटे ताजमहल, देवताओं की छाया में, जहाँ लक्ष्मी कैद है, एक दुनिया समानान्तर आदि।
सारा आकाश’ राजेन्द्र यादव द्‌वारा रचित सामाजिक समस्या पर आधारित एक आत्मकथात्मक उपन्यास है। यह उपन्यास पहले ’प्रेत बोलते हैं’(1951) नाम से लिखा गया था लेकिन प्रकाशित नहीं किया गया। सारा आकाश में प्रेत बोलते हैं कि भूमिका और अंत दोनों को बदल दिया गया। राधाकृष्ण प्रकाशन द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक में पाठकों की जिज्ञासा को देखते हुए प्रेत बोलते हैं के वे अंश भी दिए गए हैं जिन्हें सारा आकाश में बदला गया।  

 पुस्तक की भूमिका में लेखक बताते हैं कि किशोर मन में गूँजती रामधारी सिंह 'दिनकर' की ये पंक्तियाँ उपन्यास के नामाकरण का स्रोत बनीं

सेनानी, करो प्रयाण अभय, भावी इतिहास तुम्हारा है
ये नखत अमा के बुझते हैं, सारा आकाश तुम्हारा है

 राजेन्द्र यादव ने सारा आकाश के नामकरण में लिखा है, -इस कहानी के ब्याज, इन पंक्तियों को पुनः विद्रोही कवि को लौटा रहा हूँ कि आज हमें इनका अर्थ भी चाहिए। 
सारा आकाश प्रमुखत: निम्नमध्यवर्गीय युवक के अस्तित्व के संघर्ष की कहानी है, आशाओं, महत्त्वाकांक्षाओं और आर्थिक-सामाजिक, सांस्कारिक सीमाओं के बीच चलते द्‌वंद्‌व, हारने-थकने और कोई रास्ता निकालने की बेचैनी की कहानी है।

सारा आकाश का शीर्षक प्रतीकात्मक है। लेखक के शब्दों में सारा आकाश की ट्रेजडी किसी समय या व्यक्ति विशेष की ट्रेजडी नहीं, खुद चुनाव न कर सकने की, दो अपरिचित व्यक्तियों को एक स्थिति में झोंककर भाग्य को सराहने या कोसने की ट्रेजडी है। संयुक्त परिवार में जब तक यह चुनाव नहीं है, सकरी और गंदी गलियों की खिड़कियों के पीछे लड़कियाँ सारा आकाश देखती रहेंगी, लड़के दफ़्तरों, पार्कों और सड़कों पर भटकते रहेंगे।
एकांत आसमान को गवाह बनाकर आप से लड़ते रहेंगे, दो नितान्त अकेलों की यह कहानी तब तक सच है, जब तक उनके बीच का समय रुक गया है।

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